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मोनालिसा भोसले-फरमान खान मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- “खुद को भाग्यशाली समझें कि केरल में हैं”

मोनालिसा भोसले-फरमान खान मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा- “खुद को भाग्यशाली समझें कि केरल में हैं”

प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आईं मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दोनों खुद को भाग्यशाली समझें कि वे इस समय केरल में हैं। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर बुधवार को आदेश आने की संभावना है।

जस्टिस कौसर एडप्पागथ की एकल पीठ ने मंगलवार को दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह को लेकर मध्य प्रदेश में जिस तरह का माहौल और धमकियां सामने आई हैं, ऐसे में केरल में होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। इस पर दंपति की ओर से पेश वकील ने कहा कि “शायद यही कारण है कि आज हम जीवित हैं।”

कुंभ मेले से सुर्खियों में आई थीं मोनालिसा

मोनालिसा भोसले वर्ष 2025 के प्रयागराज महाकुंभ में मनकों की माला बेचते हुए वायरल हुए वीडियो के बाद देशभर में चर्चा का विषय बन गई थीं। इसी साल उन्होंने केरल में मोहम्मद फरमान खान से विवाह किया था। हालांकि शादी के कुछ समय बाद यह मामला विवादों में घिर गया और विवाह की वैधता को लेकर सवाल उठने लगे।

उम्र को लेकर विवाद, कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें

मामले में मुख्य विवाद मोनालिसा की उम्र को लेकर है। दंपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. ससींद्रन ने अदालत में दावा किया कि विवाह के समय मोनालिसा बालिग थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी संगठनों और मध्य प्रदेश प्रशासन के कुछ अधिकारियों द्वारा उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की जा रही है। वकील का कहना है कि बाद में सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर उम्र से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।

वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विवाह की वैधता स्वयं संदेह के घेरे में है। उनका तर्क था कि शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई, जबकि दूल्हा मुस्लिम है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा की जन्मतिथि दिसंबर 2009 है, जिससे विवाह के समय वह नाबालिग साबित होती हैं। ऐसे में बाल संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की संभावना बनती है।

अपहरण और फर्जी दस्तावेजों के आरोप

राज्य सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि फरमान खान के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले में जालसाजी से संबंधित धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कुछ तर्कों पर सवाल भी उठाए। अदालत ने यह उल्लेख किया कि कथित पीड़िता ने स्वयं अपने पति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

कई राज्यों में चल रही कानूनी कार्रवाई

यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि इससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही केरल और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में चल रही है। इसी बीच तिरुवनंतपुरम की एक पॉक्सो अदालत में दायर निजी शिकायत में फरमान खान के साथ-साथ कई वामपंथी नेताओं पर भी विवाह संपन्न कराने में भूमिका निभाने के आरोप लगाए गए हैं।

फिलहाल सभी की नजरें केरल हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस बहुचर्चित मामले की कानूनी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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