एसआईआर मामला: 42 पूर्व जजों ने खुला पत्र लिखकर चुनाव आयोग को कमजोर करने की कोशिश पर जताई चिंता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 42 पूर्व न्यायाधीशों ने गुरुवार को
खुले पत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए
चलाए जा रहे कथित अभियान पर गंभीर चिंता जताई। पूर्व न्यायाधीशों ने बिना ठोस सबूत के ‘वोट
चोरी’ के आरोप लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार ‘चोर’ और
‘समझौता किया हुआ’ बताने से लोकतंत्र में जनता का भरोसा कमजोर होने का खतरा है।
खुले पत्र में कहा गया, “संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें बदनाम करना
नहीं।” पत्र पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और पंकज मित्तल समेत अन्य पूर्व न्यायाधीशों
ने हस्ताक्षर किए हैं।
पूर्व न्यायाधीशों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बचाव करते हुए कहा कि
यह मतदाता सूचियों को स्वच्छ और सटीक बनाए रखने के उद्देश्य से किया जाने वाला कानूनी रूप से
स्थापित अभ्यास है।
पत्र में कहा गया कि “विश्वास लोकतंत्र की मुद्रा है।” साथ ही चेतावनी दी गई कि चुनावों को अवैध या
अविश्वसनीय साबित करने की कोशिशें अशांति को बढ़ावा दे सकती हैं और अराजक तत्वों को प्रोत्साहित
कर सकती हैं।
खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में तीन पूर्व हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। इनमें जम्मू-
कश्मीर और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.सी. पटेल, कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य
न्यायाधीश सुभ्रो कमल मुखर्जी और सिक्किम हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश परमोद कोहली शामिल
हैं।
इसके अलावा कई हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों के साथ-साथ वैधानिक निकायों और नियामक संस्थाओं
के पूर्व सदस्य भी पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल हैं।
यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने लोकसभा में नेता
प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन को
लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष में साहस है तो उसे उन सीटों से इस्तीफा दे देना
चाहिए, जिन पर वह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए चुनावों के जरिए जीता है।



